Travelogue

मस्त मस्त मुन्नार

मुन्नार: अपने इस अज्ञान को स्वीकारने में मुझे तनिक भी संकोच नहीं कि मुन्नार का नाम एक हिल स्टेशन के तौर पर मैने संजीदगी से स्वीकार नहीं किया। एक उत्तर भारत का निवासी होने के नाते हिल स्टेशनों को लेकर मेरे पास लंबी कतार थी-लद्दाख से लेकर नैनीताल तक। पर मैं फिर कहूंगा कि हिमालय …

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चूंकि ये बिहारहै

भगवानबुद्ध के विश्रामस्थल ‘विहार‘ शब्दसेउपजाबिहार।दोतिहाईदेश घूमलेने के बावजूदयह अनूठाबिहारमेरेलिए अनछुआहीथा।देश के दोमहानसाम्राज्योंमौर्यवंशऔरगुप्तवंश की राजधानीपाटिलिपुत्र इसकी ‘कैपिटल’ जानेकाअचानकसंयोगबना।है।सोउड़ चलेबिहार। हवाईजहाजजबजमीनकोछूनेहीवालाथाकिविंडोसेहरियालीऔरउंचीउंचीअट्टालिकाएंनजरआनेलगीं।लगाबिहारतोबदलरहाहै।बाहरहवाईअड्डेपरजयप्रकाशनारायण कानाम देखातोअहसासहुआकिकहींतोइसविभूति की विरासत की कद्रहै।परजबहवाईअड्डेपरटैक्टरों के जरियेढोयाजातासामान देखा, एयरपोर्ट की सुस्तव्यवस्थाएं देखीं, घंटेपरलगेजकाइंतजारकिया, लगाबिहारबदस्तूरबेहालहै। बाहरनिकलेतोलगा एयर पोर्ट के चारोतरफबसावट। शहर के बीचोंबीच।आमतौरपर ऐसावर्जितहीरहताहैसुरक्षाकारणोंसे।पूछातो पता चला शहरबसतागयातोपूछताकौनहै।अपनावाहनआगयाथा, चारोतरफहरियाली देख करमनप्रसन्नथा।गंगाआगयी। नदीकाइतनाचैड़ापाट, कहींनहीं देखा।ऐसीसुरसरि के तटपरहीविशालसंस्कृतियोंकाजन्मलेनासहजसंभवथा।परअबक्याहोगयाबेचारेबिहारको?नयापुलथा। पता …

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