Poetry

सुखाना होगा ‘अमृत’

साधना का पर्व पूर्ण होने के बाद रावण पर राम की विजय ज़रूरी है हाँ, विजय के बाद राम रह जाना उससे भी ज़रूरी है विजय ज़रूरी है क्योंकि उपभोग और अहम् का रावण हो गया है अतिकाय महाकाय वसुधा का विजेता दशमुख है वो ज्ञान से लेकर शौर्य के सिर पर सब सिर्फ स्वार्थ …

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कमरा

मेरा कमरा बिखरे कागज बिखरे कपड़े और वो लगाती है अधिकार भरी झिड़की। और मन के भीतर बिखरा ककहरा कहीं कांच सा-कहीं किरिच सा रात के सन्नाटे मे मैं उन्हें पुकारता हूं पुचकारता हूं उनको कविता बनाता हूं।

मौनहोगयीकविता

हेअटल हृदय कापूर्णसत्य थीतुम्हारेलिए कविता संवेदना की सूक्तिसी शब्द की शक्तिसी हृदय की भक्तिसी तुम्हारीमूलप्रकृतिसी दूसरीतरफराजनीति उनकेलिए ‘राज’ तुम्हारेलिए ‘नीति’ जीवनका ‘अर्धसत्य’थी,तुम्हारे शब्दोंमे परराष्ट की मांगथीकुछदूसरेअर्थोंमें तुमनेउसेस्वीकारकिया सर्पकोकंठकाहारकिया भीड़ काकोलाहल औरइसभीड़ में कुछछूुटनेलगीकविता परइसकीयादलिए तुम बढ़तेरहे तिल-तिलजलतेरहे ताकिराष्टरथ बढ़तारहे राजकानीतिपरहोतारहाआघात कबतककविताकादिलसहसकतावज्रपात तुम देख न पाए मुस्कुराते शत्रु की मांद तुम्हारीपीठमें धंसाछुरीसाचांद फिरतुम शांतहोगये बरसों के …

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