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सुखाना होगा ‘अमृत’

साधना का पर्व पूर्ण होने के बाद रावण पर राम की विजय ज़रूरी है हाँ, विजय के बाद राम रह जाना उससे भी ज़रूरी है विजय ज़रूरी है क्योंकि उपभोग और अहम् का रावण हो गया है अतिकाय महाकाय वसुधा का विजेता दशमुख है वो ज्ञान से लेकर शौर्य के सिर पर सब सिर्फ स्वार्थ …

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मिशन मंगल में है चंद्रयान के दर्द की दवा

चंद्रयान मिशन के दर्द की दवा का एक ठिकाना फिल्म ‘मिशन मंगलम’ भी है। फिल्म सामान्य सुविधाओं और सस्ते की शर्त के बीच मंगल ग्रह तक पहुंचने की दास्तान है। फिल्म हार के अनुभव से जीत का आसमान छूने की भी कहानी है। एक बड़े प्रोजेक्ट में असफलता के बाद राकेश धवन को (अक्षय कुमार) …

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केसरीः लम्बी दाढ़ी, बला की बहादुरी और इश्क

केसरी की नाकामी के तमाम कारण हो सकते थे। अंग्रेजों के खिलाफ जंग की बजाय अंग्रेजों के लिए लड़ाई! इतिहास का ऐसा किरदार जिसकी अधिकांश हिन्दुस्तानियों ने तस्वीर तक न देखी! इश्क करे वो भी पेट तक दाढ़ी के साथ! सारागढ़ी इतना छोटा इलाका कि नक्शे में लैंस से खोजना पड़े! मुद्दा भी अफगानिस्तान का, …

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आखिर युवाक्योंपहनतेहैंफटीजीन्स

जीन्ससेज्यादा यंग वल्र्ड के दिलोदिमागमेंबसीड्रेसकोईऔरहैक्या? दुनियाभरमेंजीन्स के कद्रदानकरोड़ोंमंेहैं।कोईकहताहैकिशरीरसेअलगनहींबिल्कुल शरीर के ढांचेमेंढलीहुईलगतीहै, यह जीन्स।कोईइसलिए इसकामुरीदहैकिरोज-रोजधुलनेऔरप्रेसकरने की झंझट सेनिज़ातदिलातीहै ये।औरकोईतोइसेकम्प्लीटलीवर्कफ्रेंडलीमानताहै।परइनसबसेअलगजोचीजइसे खासबनातीहैवहहैकिफटने के बादइसकाऔरकीमतीहोजाना। आखिरइसकाकारणक्याहै? क्योंजेनजेडफटीजीन्सकीदीवानीहैै।क्याइसेमहजफैशन कह कर खारिजकियाजासकताहै।परफैशन के भीसामाजिकमनोवैज्ञानिककारणहोतेहैं।औरफैशनतोमहजमौसमीहोताहै, आज ये तोकलवो।परजीन्स के साथ ऐसाक्योंनहीं।क्योंफटीजीन्सकाचलनबारबारलौटकरआताहै, या यूंकहंेंकमोबेशबनारहताहैऔरअक्सरउफानका रूपलेलेताहै।परइसफटीजीन्स के टेªन्डकोजाननेसेपहलेजीन्सकीकहानीजानलें। किस्सा एजीन्स वर्ष1870 की बातहै। एक जर्मनव्यापारीलोएबस्टाॅस ने कामकाजीलोगांे की जरूरत को ध्यानमें रखकरट्विल्डकाॅटनसेबनापरिधानप्रस्तुतकिया, जिसेलोगों ने …

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कमरा

मेरा कमरा बिखरे कागज बिखरे कपड़े और वो लगाती है अधिकार भरी झिड़की। और मन के भीतर बिखरा ककहरा कहीं कांच सा-कहीं किरिच सा रात के सन्नाटे मे मैं उन्हें पुकारता हूं पुचकारता हूं उनको कविता बनाता हूं।

मौनहोगयीकविता

हेअटल हृदय कापूर्णसत्य थीतुम्हारेलिए कविता संवेदना की सूक्तिसी शब्द की शक्तिसी हृदय की भक्तिसी तुम्हारीमूलप्रकृतिसी दूसरीतरफराजनीति उनकेलिए ‘राज’ तुम्हारेलिए ‘नीति’ जीवनका ‘अर्धसत्य’थी,तुम्हारे शब्दोंमे परराष्ट की मांगथीकुछदूसरेअर्थोंमें तुमनेउसेस्वीकारकिया सर्पकोकंठकाहारकिया भीड़ काकोलाहल औरइसभीड़ में कुछछूुटनेलगीकविता परइसकीयादलिए तुम बढ़तेरहे तिल-तिलजलतेरहे ताकिराष्टरथ बढ़तारहे राजकानीतिपरहोतारहाआघात कबतककविताकादिलसहसकतावज्रपात तुम देख न पाए मुस्कुराते शत्रु की मांद तुम्हारीपीठमें धंसाछुरीसाचांद फिरतुम शांतहोगये बरसों के …

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मस्त मस्त मुन्नार

मुन्नार: अपने इस अज्ञान को स्वीकारने में मुझे तनिक भी संकोच नहीं कि मुन्नार का नाम एक हिल स्टेशन के तौर पर मैने संजीदगी से स्वीकार नहीं किया। एक उत्तर भारत का निवासी होने के नाते हिल स्टेशनों को लेकर मेरे पास लंबी कतार थी-लद्दाख से लेकर नैनीताल तक। पर मैं फिर कहूंगा कि हिमालय …

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चूंकि ये बिहारहै

भगवानबुद्ध के विश्रामस्थल ‘विहार‘ शब्दसेउपजाबिहार।दोतिहाईदेश घूमलेने के बावजूदयह अनूठाबिहारमेरेलिए अनछुआहीथा।देश के दोमहानसाम्राज्योंमौर्यवंशऔरगुप्तवंश की राजधानीपाटिलिपुत्र इसकी ‘कैपिटल’ जानेकाअचानकसंयोगबना।है।सोउड़ चलेबिहार। हवाईजहाजजबजमीनकोछूनेहीवालाथाकिविंडोसेहरियालीऔरउंचीउंचीअट्टालिकाएंनजरआनेलगीं।लगाबिहारतोबदलरहाहै।बाहरहवाईअड्डेपरजयप्रकाशनारायण कानाम देखातोअहसासहुआकिकहींतोइसविभूति की विरासत की कद्रहै।परजबहवाईअड्डेपरटैक्टरों के जरियेढोयाजातासामान देखा, एयरपोर्ट की सुस्तव्यवस्थाएं देखीं, घंटेपरलगेजकाइंतजारकिया, लगाबिहारबदस्तूरबेहालहै। बाहरनिकलेतोलगा एयर पोर्ट के चारोतरफबसावट। शहर के बीचोंबीच।आमतौरपर ऐसावर्जितहीरहताहैसुरक्षाकारणोंसे।पूछातो पता चला शहरबसतागयातोपूछताकौनहै।अपनावाहनआगयाथा, चारोतरफहरियाली देख करमनप्रसन्नथा।गंगाआगयी। नदीकाइतनाचैड़ापाट, कहींनहीं देखा।ऐसीसुरसरि के तटपरहीविशालसंस्कृतियोंकाजन्मलेनासहजसंभवथा।परअबक्याहोगयाबेचारेबिहारको?नयापुलथा। पता …

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