मिशन मंगल में है चंद्रयान के दर्द की दवा

चंद्रयान मिशन के दर्द की दवा का एक ठिकाना फिल्म ‘मिशन मंगलम’ भी है। फिल्म सामान्य सुविधाओं और सस्ते की शर्त के बीच मंगल ग्रह तक पहुंचने की दास्तान है। फिल्म हार के अनुभव से जीत का आसमान छूने की भी कहानी है।

एक बड़े प्रोजेक्ट में असफलता के बाद राकेश धवन को (अक्षय कुमार) खानापूरी माने जा रहे मिशन मंगल से जोड़ दिया जाता है। प्रोजेक्ट की असफलता की जिम्मेदार तारा शिंदे (विद्या बालान) धवन को ज्वाइन करती हैं। दोनों मिशन मंगल को हकीकत में तबदील करने का फैसला लेते हैं पर एक के बाद एक झंझावात आते जाते हैं।

मिशन मंगलम ऐसी फिल्म है जो उपभोक्तावाद के शिकार नारीवाद को एक सार्थक आयाम में पेश करती है। फिल्म तारा समेत पांच महिला वैज्ञानिकों की कहानी है जो अपनी अपनी जिंदगी के दांव पेंचों के बावजूद मिशन मंगल को मुकाम तक पहुंचा देती है। अक्षय कुमार और अन्य पुरुष एक इस अभियान में धवन एक सहयोगी के रूप् में नजर आते हैं, प्रतियोगी के रूप में नहीं।

तारा के किरदार में विद्या पुरुषवादी पति, बिगडै़ल बच्चों साथ इसरो के कामकाज में संतुलन बिठाने में जूझती नजर आती है। उन्मुक्त एकता गांधी (सोनाक्षी सिन्हा) नासा ज्वाइन करने की जुगत हैं और इसरो उसके लिए महज पड़ाव है। कृतिका अग्रवाल तापसी पन्नू आत्मविश्वास की कमी से जूझ रही ऐसी महिला की भूमिका में है, जो मंगल तक पहुंचना चाहती है पर कार तक नहीं सीख पा रहीं।

पिंक, उरी, सर्जिकल स्टाइक मे जरिये हुनर का लोहा मनवा चुकी कृति तलाकशुदा मुस्लिम महिला नेहा सिद्दीकी के किरदार में हैं। तेलुगु अदाकारा नित्या मेनन ऐसी महिला वैज्ञानिक के किरदार में हैं जो सास से त्रस्त है और गर्भवती होने के बावजूद अपने काम को अंजाम देती है। ग्रहों से भयभीत वैज्ञानिक के किरदार में परमेश्वरन (शरमन जोशी) और बुजुर्ग वैज्ञानिक के किरदार में एचजी दत्तत्रेय अनंत अययर है।

फिल्म विभागों में पसरी सरकारी नौकरी की सोच को तोड़ कर एक जज्बा पैदा करती है। विद्या एक जगह कहती हैं-हमने सपने को पूरा करने के लिए नौकरी करते हैं। नौकरी मिल जाती है सपना छूट जाता है। मिशन मंगल के प्रोजेक्ट के साथ फिल्म बढ़ती है और तारा प्रोजेक्ट और परिवार दोनों को संभाल लेती है पर प्राथमिकता प्रोजेक्ट है। वो कहती हैं मैं अपनी बेटी को जानती हूं पर प्रोफेशन से प्यार करती हूं। उन्मुक्त एकता का भारतीय प्रोजेक्ट और परंपरावादी परमेश्चरन से प्रेम हो जाता है।

घर के लिए जूझ रही नेहा सिद्दीकी को साथियों का घर मिल जाता हे। मेटरनिटी लीव छोड़ नित्या अपने बच्चे की केयर प्रोजेक्ट के साथ करती है। कृतिका का घायल सैनिक पति अपनी सेवा छोड़ प्रोजेक्ट के लिए अपनी पत्नी को भेजते हुए कहता है है-देश के लिए मैं भी लड़ रहा हूं तो तुम भी देश का नाम आकाश में लेकर जा रही हो।

फिल्म में आत्मलीन वैज्ञानिक के किरदार के तौर पर अक्षय कुमार और इसरो डायरेक्टर के रोल में विक्रम गोखले खासे जमें है। शेष सभी ने अपनी भूमिका से न्याय किया है। फिल्म में पूड़ी के जरिये अंतरिक्ष विज्ञान है, विक्रम साराभाई और कलाम की सोच है, विज्ञान को रोचक अंदाज में पेश करने का हुनर है स्तरीय कामेडी है, विदेशी सोच और भारतीयता के बीच जंग है पर सबसे बढ़कर काम के प्रति जुनून भी है, और इसरो का जज़्बा भी।

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