केसरी की नाकामी के तमाम कारण हो सकते थे। अंग्रेजों के खिलाफ जंग की बजाय अंग्रेजों के लिए लड़ाई! इतिहास का ऐसा किरदार जिसकी अधिकांश हिन्दुस्तानियों ने तस्वीर तक न देखी! इश्क करे वो भी पेट तक दाढ़ी के साथ! सारागढ़ी इतना छोटा इलाका कि नक्शे में लैंस से खोजना पड़े! मुद्दा भी अफगानिस्तान का, पाकिस्तान का नहीं! पर इतिहास पर आधारित इस फिल्म ने कामयाबी पर इतिहास बना दिया-उन्हीं कारणों के चलते जो इसकी नाकामयाबी का कारण हो सकती थीं।
अनुराग सिंह के शानदार निर्देशन में बनी इस फिल्म की कामयाबी का सेहरा सबसे पहले स्क्रिप्ट को दिया जाना चाहिए। इतिहास बताता है कि सारागढ़ी की लड़ाई में दस हजार हमलावरों से 21 सिख सैनिकों ने लड़कर जान दे दी, और हमलावरों का मकसद नाकाम कर दिया। स्क्रिप्ट साबित कर देती है ऐसी कुरबानी अंग्रेजों को खुश करने के लिए नहीं हो सकती।
ऐसा सर्वोच्च बलिदान सिर्फ अपनी मिट्टी के प्रति प्यार, स्वाभिमान और धर्म-संस्कृति के लिए किया जा सकता है। और स्क्रिप्ट का ही कारनामा है कि आप सौ साल पहले के अफगानिस्तान में आज की तालिबानी सोच को भी देख पाते हो और हिन्दुस्तान की बहादुरी का सम्मान करने वाली जबरदस्त अफगानी कौम को भी।
चिकने चुपड़े माडलों की दुनिया में लम्बी दाढ़ी साथ इश्क करने की हिम्मत अक्षय कुमार ने कर दिखायी है। ऐसा शानदार इश्क आपने देखा नहीं होगा। शानदार फिल्मों में लोकेशन खुद एक किरदार बन जाती है। अफगान सीमा के अनदेखा प्राकृतिक सौन्दर्य। जिद्दी कठोर पत्थर भी और बर्फ की शांत सफेदी भी। परिणीती चोपड़ा ग्रामीण पंजाबन के किरदार में खूबसूरती से खिली हैं। मुल्ला सैदुल्ला के किरदार में राकेश चतुर्वेदी ओम बिल्कुल बासी तालिबनी सोच का चेहरा नजर आते हैं।
फिल्म में जंग के बीच प्रेम भी है, काॅमेडी भी, दर्द भी पर सबसे ऊपर जोश। शायद जिन्दगी भी ऐसी ही है। और जिन्दगी जैसी फिल्म का जीवंत होना लाजिमी है। फिल्म कहानी ही नहीं कहती ईशर सिंह के जरिए एक लीडरशिप को डेवलप करने की दास्तान भी कहती है। कभी खून का घूंट पीना तो कभी जवाब कह कर नहीं कर कर देना। ऐसे समूह को संभालना जहां अराजकता हो, हर पल कोई आपको काटता हो। ऐसे में नायक कभी उद्दंडता को दंड से तोड़ता है, तो कभी संबंधों को संवेदना को सींचता है।
केसरी अहसास कराती है कि साजिशों से सना इतिहास खुद भी साजिशों का शिकार है। न जाने इतिहास के कितने पन्ने पढ़ाए नहीं गए, कितनों के अर्थ बदल दिए गए और सबसे अहम देशप्रेम, स्वाभिमान और बहादुरी जैसे जो जज्बात इतिहास बनाते है, इतिहास लिखने में वह ‘भूल’ जाए गए। फिल्म ने कागज के इतिहास को दुरुस्त कर सिनेमा की दुनिया में नया इतिहास बनाया है।

